अमलतास. Powered by Blogger.
Showing posts with label कविता. Show all posts
Showing posts with label कविता. Show all posts

बोलता है उदास सन्नाटा

>> Sunday, 10 July 2011

'नज़्म'

बोलता है उदास सन्नाटा
  •     कुमार शिव



रूबरू है शमा के आईना
बंद कमरे की खिड़कियाँ कर दो
शाम से तेज चल रही है हवा



 ये जो पसरा हुआ है कमरे में
कुछ गलतफहमियों का अजगर है
ख्वाहिशें हैं अधूरी बरसों की
हौसलों पर टिका मुकद्दर है



रात की सुरमई उदासी में
ठीक से देख मैं नहीं पाया
गेसुओं से ढका हुआ चेहरा
आओ इस काँपते अँधेरे में
गर्म कहवा कपों में भर लें हम
मास्क चेहरों के मेज पर रख दें
चुप रहें और बात कर लें हम



महकती हैं बड़ी बड़ी आँखें
हिल रहे हैं कनेर होटो के
बोलता है उदास सन्नाटा






Read more...

हरा बाँस वन

>> Saturday, 2 July 2011

'कविता'


हरा बाँस वन



मैं ने देखा है
पहाड़ों को पक्षियों की तरह उड़ते हुए
और भीड़ पर धमाधम गिरते हुए

जब चलती है काली आंधी

एक साथ उड़ते हैं पहाड़
रेगिस्तान बन जाते हैं शहर

चलने लगते हैं दरख़्त एक दूसरे की शाखें पकड़े
तेजी से दौड़ती हैं काँटेदार झाड़ियाँ

अचानक उठ खड़ी होती है

लेटी हुई नदी
बिखर जाती हैं उस की खुली लटें
बाँस वन की भुजाओँ पर
 

नदी का तेज बहाव
लटका देता है
मृत देहों के चिथड़े
बाँसों पर

धीरे धीरे हरा बाँस वन
नदी के लाल पानी में डूबने लगता है

          • कुमार शिव

Read more...

  © Blogger template Werd by Ourblogtemplates.com 2009

Back to TOP